बीजापुर जिले में जंगल कटाई के विरोध में ग्रामीण हुए एकत्रित, वन विभाग के खिलाफ फूटा जनआक्रोश, देखें वीडियो –
जंगल की कटाई से परेशान ग्रामीण
( रिपोर्टर –ललित चक्रधारी)
17 दिसम्बर 2025/बीजापुर– छत्तीसगढ़ के पाँचवीं अनुसूचित क्षेत्र अंतर्गत आने वाले बीजापुर जिले में बड़े पैमाने पर हो रही जंगल कटाई के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई देने लगा है। दर्जनों गांवों से आए सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर वन विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और जंगलों की अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि उनके क्षेत्र में बिना ग्राम सभा की अनुमति, बिना पर्यावरण स्वीकृति और वन अधिकार अधिनियम, 2006 की अनदेखी करते हुए हरे-भरे जंगलों को मशीनों से काटा जा रहा है। यह कटाई न सिर्फ आदिवासी समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
ग्राम सभा की अनदेखी, कानून की खुलेआम अवहेलना
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि संबंधित गांवों की ग्राम सभाओं में कभी भी जंगल कटाई को लेकर सहमति नहीं दी गई। इसके बावजूद वन विभाग और उससे जुड़े ठेकेदार जंगलों में काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पाँचवीं अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम सभा सर्वोच्च संस्था है, लेकिन यहाँ उसकी भूमिका को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
आदिवासी जीवन पर सीधा हमला
ग्रामीणों के अनुसार जंगल ही उनकी आजीविका, संस्कृति और पहचान है। जंगल कटने से ,महुआ, तेंदूपत्ता, चिरौंजी जैसे वनोपज समाप्त हो रहे हैं,जल स्रोत सूखने लगे हैं।,वन्य जीव गांवों की ओर आने को मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
वन विभाग पर गंभीर आरोप –
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वन विभाग स्थानीय लोगों को अंधेरे में रखकर काम कर रहा है। कटाई से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा रहे। सवाल पूछने पर ग्रामीणों को डराया-धमकाया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि अगर समय रहते जंगल कटाई नहीं रुकी तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
प्रशासन से सीधी मांग –
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें हैं:–
1. जंगल कटाई पर तत्काल रोक,
2. ग्राम सभा की अनुमति के बिना हुए सभी कार्य रद्द हों,
3. दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई,
4. वन अधिकार अधिनियम का पूर्ण पालन,
5. ग्रामीणों से संवाद कर पारदर्शी जांच,
चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया, तो यह आंदोलन जिला स्तर से बढ़कर राज्य स्तर तक जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
नोट –ग्रामीणों ने यह जानकारी हमारे संवाददाता को दी है।