कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने युवाओं को दिया अपनी जड़ों से जुड़ने का मंत्र

जगदलपुर में 5-दिवसीय पुरातात्विक कार्यशाला का समापन

Jan 31, 2026 - 21:03
कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने युवाओं को दिया अपनी जड़ों से जुड़ने का मंत्र
CG VARTA -

जगदलपुर, 31 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग के पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय के तत्वावधान में जगदलपुर में चल रही पांच दिवसीय कार्यशाला बस्तर का पुरातत्त्वीय एवं सांस्कृतिक परिदृश्य का शनिवार को गरिमामयी समापन हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन के समापन समारोह में कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और युवाओं को संबोधित करते हुए एक विचारणीय संदेश देते हुए कहा कि सिर्फ त्यौहार मनाना या रस्में निभाना ही काफी नहीं है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि वे क्यों मनाए जाते हैं और उनके पीछे का वैज्ञानिक आधार क्या है।

              अपने उद्बोधन में विरासत के स्वरूप पर चर्चा करते हुए श्री छिकारा ने युवाओं को समझाया कि हेरिटेज केवल दिखाई देने वाले मंदिरों या प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है, जिसे हम 'टेंजिबल' कहते हैं। हमारी भाषा, लिपि, त्यौहार और परंपराएं हमारी 'इन्टेन्जिबल' यानी अमूर्त विरासत हैं, जो बस्तर में अत्यंत समृद्ध हैं और इसे सहेजने की महती जिम्मेदारी अब युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने उपस्थित छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे केवल पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि एक सक्रिय नागरिक बनें। वे बस्तर की संस्कृति के संवाहक बनकर अगली पीढ़ी को यह समझाएं कि हमारी परंपराओं के पीछे क्या तार्किक कारण हैं, ताकि यह ज्ञान कभी विलुप्त न हो।

         उल्लेखनीय है कि बीते 27 जनवरी को महापौर श्री संजय पांडेय द्वारा इस कार्यशाला का शुभारंभ किया गया था, जिसका उद्देश्य बस्तर की ऐतिहासिक और पुरातात्त्विक धरोहरों पर अकादमिक विमर्श करना था। पिछले पांच दिनों में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय सहित संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों के लगभग 75 चयनित विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने 10 तकनीकी सत्रों में भाग लिया। इन सत्रों में बस्तर के इतिहास लेखन, संग्रहालय विज्ञान, रीवां उत्खनन और आदिम भाषा विरासत जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने गंभीर चर्चा की।

            कार्यशाला के अंतिम दिन यानी आज समापन सत्र से पूर्व प्रतिभागियों को बस्तर के ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों का परिभ्रमण भी कराया गया, ताकि उन्हें कक्षा के ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हो सके। कार्यक्रम के अंत में कलेक्टर ने आयोजक पुरातत्व विभाग के प्रयासों की सराहना की और उम्मीद जताई कि यहां से प्रज्वलित ज्ञान की मशाल समाज को नई दिशा देगी। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन भी उपस्थित थे।

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