मोबाइल ऐप्स द्वारा टोकन नहीं कटने से परेशान हो रहे किसान
( रिपोर्ट –ललित चक्रधारी )– जगदलपुर, बस्तर जिले में ‘ किसान तुंहर टोकन ’ योजना द्वारा किसानों को सुविधा के लिए ऐप्स (apps) शुरू की गई थी, ताकि घर बैठे स्लॉट बुक कर सकें और बिना भीड़भाड़ के फसल की खरीदी हो सके। लेकिन ज़मीन पर हालात बिल्कुल उलट दिख रहे हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि सर्वर खुलते ही सिर्फ 2–3 मिनट में सारे स्लॉट फुल हो जाते हैं। कई किसान सुबह से मोबाइल लेकर बैठे रहते हैं, लेकिन जैसे ही लॉगिन करते हैं—या तो सर्वर डाउन दिखता है, या OTP नहीं आता, या बार-बार “try again” का मैसेज आता है। जिनके पास साधारण फोन है, नेटवर्क कमज़ोर है या डिजिटल ज्ञान कम है, वे तो बुकिंग कर ही नहीं पा रहे हैं।
लिमिट फिक्स होने से किसान परेशान हैं—चाहे उनका उत्पादन ज़्यादा हो, लेकिन सिस्टम सिर्फ कम मात्रा का स्लॉट दे रहा है। ऐसे में किसान कई-कई दिन मंडी का चक्कर लगा रहे हैं।
सबसे बड़ी बात—किसान अपनी ही फसल को बेच नहीं पा रहे। खरीदी केन्द्रों में स्लॉट दिखता ही नहीं, और बिना स्लॉट के खरीदी नहीं हो रही।
इसका सीधा असर किसान की जेब पर पड़ रहा है।
👉 घर का खर्चा कैसे चले?
👉 बैंक की किश्तें कैसे भरें?
👉 कृषि मजदूरी, खाद-बीज का पैसा कैसे निकलें?
“ सरकार डिजिटल सुविधा देने की बात करती है, लेकिन जब तक सर्वर स्थिर नहीं होगा, स्लॉट की पारदर्शिता नहीं होगी और लिमिट की समस्या हल नहीं होगी—तब तक किसान परेशान ही रहेंगे। “