बड़ेमुरमा में उत्साहपूर्वक मनाया गया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस

Mar 1, 2026 - 17:41
बड़ेमुरमा में उत्साहपूर्वक मनाया गया राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
CG VARTA -

जगदलपुर, 01 मार्च 2026/ “विज्ञान वह दीपक है जो अज्ञानता के अंधकार को ज्ञान के प्रकाश में बदल देता है।” इसी प्रेरणादायी विचार के साथ बस्तर जिले के ग्रामीण अंचल स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बड़ेमुरमा में 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का गरिमामय आयोजन किया गया। एपीजे अब्दुल कलाम विज्ञान क्लब के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल महान भारतीय वैज्ञानिक सर सीवी रमन की विरासत को याद किया, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के भीतर छिपी वैज्ञानिक प्रतिभा को एक नया मंच भी प्रदान किया।

                    यह दिवस वर्ष 1928 में डॉ सीवी रमन द्वारा खोजी गई 'रमन प्रभाव' की ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में मनाया जाता है, जिसके लिए उन्हें 1930 में भौतिकी के प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था। जिला शिक्षा अधिकारी श्री बीआर बघेल और जिला विज्ञान टीम के वरिष्ठ सदस्यों जयनारायण पाणिग्राही, सचिन कारेकर, मनीष श्रीवास्तव और जी श्रीनिवास के कुशल मार्गदर्शन में बस्तर जिले में वैज्ञानिक गतिविधियों की जो लहर चल रही है, उसी की एक जीवंत कड़ी बड़ेमुरमा के इस आयोजन में देखने को मिली।

                  इस वर्ष के कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत को गति देने वाली थीम रही। इस विषय पर कक्षा 11 वीं की छात्रा नीलिमा नाग ने अपने ओजस्वी विचारों के माध्यम से विज्ञान के क्षेत्र में नारी शक्ति की भूमिका को रेखांकित किया और बालिकाओं को नवाचार के क्षेत्र में नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया। वहीं कुमारी साक्षी कश्यप ने रमन प्रभाव के वैज्ञानिक पहलुओं और सी.वी. रमन के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित जनसमूह को विज्ञान के प्रति अपनी गहरी अभिरुचि से प्रभावित किया।

                    कार्यक्रम की सबसे आकर्षक कड़ी विद्यार्थियों द्वारा प्रदर्शित किए गए विज्ञान मॉडल और प्रयोग रहे। विद्यालय परिसर एक छोटी प्रयोगशाला के रूप में जीवंत हो उठा, जहाँ छात्रों ने डिस्पोजल कप से फोन निर्माण, चुंबक के प्रयोग, टिंडल प्रभाव, जल का अपघटन और अम्ल वर्षा जैसे जटिल विषयों को सरल मॉडलों के माध्यम से समझाया। विद्यार्थियों ने परावर्तन, अपवर्तन, विलयन और सूर्य दर्शन जैसे प्रयोगों के साथ-साथ जल, अमोनिया एवं नमक के 3D मॉडल भी प्रदर्शित किए, जो उनकी रचनात्मक और तार्किक सोच का परिचायक बने।

            इस अवसर पर समीर नाग ने बच्चों को इन प्रयोगों के पीछे छिपी वैज्ञानिक अवधारणाओं की गहराई से जानकारी दी और उन्हें महान वैज्ञानिकों के पदचिन्हों पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम प्रभारी मनीष कुमार अहीर ने विज्ञान दिवस की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर प्रयोगात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देना समय की मांग है। विद्यालय के प्राचार्य श्री अरविंद त्रिपाठी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में छात्रों को केवल उत्तर खोजने वाला नहीं, बल्कि प्रश्न पूछने वाला जिज्ञासु बनने की सीख दी। प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा, छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा और जिला विज्ञान क्लब के सदस्यों की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशिष्ट बना दिया। कार्यक्रम के अंत में साक्षी कश्यप ने आभार प्रदर्शन किया।

          अंततः, ग्रामीण परिवेश के इस विद्यालय में हुआ यह आयोजन न केवल शिक्षाप्रद रहा, बल्कि इसने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो बस्तर के दूरस्थ अंचलों से भी भविष्य के महान वैज्ञानिक निकल सकते हैं।

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