केसीसी लोन लेते समय बीमा के नाम पर राशि काटने वाले बैंक बताएं—फसल बर्बाद होने पर किसान को बीमा क्लेम क्यों नहीं मिलता ?
रिपोर्ट – जय शंकर पांडे
30 अक्टूबर 2026, जगदलपुर / भारतीय किसान यूनियन टिकैत जिला बस्तर के जिला अध्यक्ष रमेश गोयल ने जिला सहकारी बैंक एवं संबंधित बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रमेश गोयल ने कहा कि जब किसान जिला सहकारी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से कृषि ऋण लेता है, तब बीमा के नाम पर किसान के खाते से राशि काट ली जाती है। किसान इस उम्मीद में बीमा प्रीमियम देता है कि प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, बाढ़ अथवा अन्य कारणों से उसकी फसल नष्ट होने पर उसे बीमा क्लेम के रूप में आर्थिक सहायता मिलेगी।
लेकिन जब वास्तव में किसान की मेहनत से तैयार फसल बर्बाद हो जाती है, तब किसान बीमा राशि के लिए बैंक, बीमा कंपनी और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर होता है। आखिर किसान से बीमा प्रीमियम लेने के बाद उसकी फसल नष्ट होने पर बीमा क्लेम कौन देगा? यदि किसान को बीमा राशि नहीं मिलती तो उसके खाते से काटी गई राशि आखिर किस मद में जमा की गई और इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
भारतीय किसान यूनियन टिकैत जिला बस्तर जिला सहकारी बैंक एवं संबंधित बीमा कंपनियों से निम्न सवालों का जवाब मांगती है—
किसान के KCC खाते से बीमा के नाम पर काटी गई राशि किस बीमा कंपनी को जमा की गई?
किसान का बीमा किस योजना के अंतर्गत किया गया तथा उसकी बीमा पॉलिसी और रसीद कहां है?
फसल नष्ट होने पर किसान को बीमा क्लेम प्राप्त करने की प्रक्रिया और समय-सीमा क्या है?
जिन किसानों की फसल बाढ़ एवं अतिवृष्टि से नष्ट हुई है, उनके बीमा दावों का सर्वे और भुगतान कब होगा?
यदि किसान बीमा प्रीमियम देता है तो उसे बीमा सुरक्षा का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी किस अधिकारी और संस्था की है?
भारतीय किसान यूनियन टिकैत की मांग है कि प्रत्येक किसान को उसके खाते से काटे गए बीमा प्रीमियम का पूरा विवरण, बीमा कंपनी का नाम, पॉलिसी नंबर एवं बीमा प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाए। प्रभावित किसानों की फसलों का निष्पक्ष सर्वे कराकर नियमानुसार बीमा क्लेम का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
संगठन ने चेतावनी दी है कि किसानों के बीमा प्रीमियम की कटौती के बावजूद उन्हें उनके अधिकार का लाभ नहीं मिलता है तो भारतीय किसान यूनियन टिकैत जिला बस्तर किसानों के साथ मिलकर जिला सहकारी बैंक एवं संबंधित विभागों के सामने जवाबदेही तय कराने के लिए आंदोलन करने को बाध्य होगी।
किसान का पैसा है, किसान का अधिकार है—बीमा प्रीमियम लिया है तो बीमा क्लेम का जवाब भी देना होगा!
