ऐतिहासिक किसान आंदोलन: 8 से 10 हजार किसानों ने 100 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ किया कलेक्टर कार्यालय का घेराव

15 दिन का अल्टीमेटम, मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनिश्चितकालीन किसान पंचायत और दिल्ली के जंतर-मंतर पर होगा आंदोलन

Nov 7, 2026 - 18:12
ऐतिहासिक किसान आंदोलन: 8 से 10 हजार किसानों ने 100 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ किया कलेक्टर कार्यालय का घेराव
CG VARTA -

7 नवंबर 2026, जगदलपुर, बस्तर। बस्तर जिले में दिनांक 06 नवंबर 2026 को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) जिला बस्तर के नेतृत्व में किसानों ने अपनी जायज मांगों को लेकर ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही के नेतृत्व में आयोजित इस विशाल किसान आंदोलन में लगभग 8 से 10 हजार किसान साथियों ने 100 से अधिक ट्रैक्टर, पिकअप एवं कृषि यंत्रों के साथ कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया।

इस आंदोलन में इंद्रावती बचाव संघर्ष समिति, आदिवासी समाज, ओबीसी समाज, विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों ने संयुक्त रूप से समर्थन दिया। संगठन का दावा है कि छत्तीसगढ़ में किसानों की इतनी बड़ी भागीदारी के साथ यह एक ऐतिहासिक आंदोलन रहा।

किसानों की प्रमुख मांगें:

बाढ़ से 100 प्रतिशत नष्ट हुई फसलों के लिए 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से कुल ₹65,100 प्रति एकड़ तत्काल मुआवजा दिया जाए।

बाढ़ प्रभावित किसानों के कृषि ऋण एवं केसीसी कर्ज तत्काल माफ किए जाएं।

जिला सहकारी बैंक द्वारा केसीसी ऋण के साथ काटी गई फसल बीमा राशि का तत्काल लाभ दिया जाए। बीमा कंपनियां प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को मुआवजा दें।

बाढ़ में जिन ग्रामीणों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त एवं बह गए हैं, उन्हें ₹2.50 लाख से ₹5 लाख तक की सहायता से पक्के आवास उपलब्ध कराए जाएं।

आंदोलन के दौरान बाढ़ प्रभावित गांवों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों, सरपंचों एवं जनपद सदस्यों ने अपने-अपने लेटरहेड पर गांव की समस्याओं और जनहित से जुड़े आवेदन अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए। किसानों ने कई घंटों तक कलेक्टर कार्यालय मार्ग पर बैठकर नारेबाजी की और शासन-प्रशासन को अपनी पीड़ा से अवगत कराया।

प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों की मांगों पर विचार कर 15 दिनों के भीतर निराकरण की दिशा में कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद संगठन ने 15 दिन का समय देते हुए आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित कर किसानों के साथ घर वापसी की।

जिला अध्यक्ष रमेश गोयल ने दी आर-पार की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) जिला बस्तर के जिला अध्यक्ष रमेश गोयल ने कहा कि बस्तर का किसान आज अपनी मेहनत की फसल खो चुका है। खेतों में एक दाना नहीं बचा, घर उजड़ गए और किसान कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। इसके बावजूद किसानों को अपने हक के मुआवजे के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन को दिया गया 15 दिन का समय अंतिम अवसर है। यदि किसानों की जायज मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो भारतीय किसान यूनियन टिकैत आंदोलन को और उग्र करेगी। जरूरत पड़ी तो कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर किसान पंचायत के रूप में अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा तथा किसानों की आवाज दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंचाई जाएगी।

रमेश गोयल ने कहा कि किसानों का आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि उनके अधिकार, सम्मान और जीवन की लड़ाई है। जब तक बस्तर के बाढ़ पीड़ित किसानों को न्याय और उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

इस ऐतिहासिक आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन टिकैत के समस्त पदाधिकारी, कार्यकर्ता, किसान साथी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं इंद्रावती बचाव संघर्ष समिति के पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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