श्रमदान का जज्बा-जब बस्तर के ग्रामीणों ने हाथों में थामी झाड़ू, तो खिल उठे तालाब, बाजार और देवालय
रिपोर्ट – जय शंकर पांडे
जगदलपुर, 22 सितम्बर 2026/ सुबह की पहली किरण के साथ जब अमूमन गांवों में चहल-पहल शुरू होती है, तब जनपद पंचायत बस्तर और ग्राम पंचायत आड़ावाल की गलियों में एक अलग ही उमंग और बदलाव की बयार देखने को मिली। सेवा संकल्प अभियान के अन्तर्गत स्वच्छ भारत, विकसित भारत के आह्वान पर स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के तहत ग्रामीण, महिलाएं और युवा पूरी ऊर्जा के साथ अपने गांव को संवारने सड़कों पर उतर आए। कहीं स्वच्छ ग्राम-स्वच्छ वार्ड की होड़ थी, तो कहीं बरसों से उपेक्षित सार्वजनिक स्थलों को नया जीवन देने की जिद।

ग्राम पंचायत आड़ावाल में माहौल किसी उत्सव जैसा रहा, जहां स्वच्छता में सहभागिता की भावना से ओतप्रोत स्वच्छ ग्राम-स्वच्छ वार्ड प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यहां ग्रामीणों को कचरा प्रबंधन का नया पाठ पढ़ाया गया यह संदेश घर-घर तक पहुंचाया गया कि स्वच्छता केवल झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे को उसकी सही जगह पहुंचाना असली जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे घरों में ही गीला, सूखा, सेनेटरी और हानिकारक कचरा अलग-अलग रखेंगे, ताकि स्व-सहायता समूह की दीदियां और सफाई मित्र प्रतिदिन डोर-टू-डोर संग्रहण कर उसे सुरक्षित तरीके से पंचायत शेड तक पहुंचा सकें।
उधर, जनपद पंचायत बस्तर के उसरी और बालेगा गांवों में जनभागीदारी का अद्भुत दृश्य दिखा। ग्राम पंचायत उसरी के हाट-बाजार, जहां रोजमर्रा की भारी चहल-पहल रहती है, और आस्था के केंद्र देवालयों में ग्रामीणों ने एकजुट होकर व्यापक श्रमदान किया और देखते ही देखते समूचे परिसर को चमका दिया। वहीं, ग्राम पंचायत बालेगा में ग्रामीणों ने गांव की जीवनरेखा माने जाने वाले बड़ेपारा तालाब के संरक्षण का बीड़ा उठाया।
आस्था के स्थलों से लेकर तालाब के घाटों तक, लोगों ने खुद आगे आकर कचरे और झाड़ियों को साफ किया। सामूहिक प्रयासों की यह खूबसूरत तस्वीर इस बात का जीवंत प्रमाण बन गई कि जब पूरा गांव एक सूत्र में बंधकर ठान ले, तो स्वच्छता महज एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि जीवन जीने का गौरवशाली तरीका बन जाती है।
