“शिक्षा से क्रांति, संघर्ष से समानता: जगदलपुर में गूंजा सावित्रीबाई फुले का विचार”
जगदलपुर/03 जनवरी 2026
नारी सशक्तीकरण की प्रतीक, सामाजिक न्याय की अग्रदूत और देश की पहली महिला शिक्षिका
क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती शनिवार को
तिरंगा चौक, अम्बेडकर वार्ड में गरिमा, श्रद्धा और सामाजिक चेतना के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में महिलाओं ने
सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक शिक्षिका नहीं थीं,
बल्कि वे समानता, शिक्षा और महिला अधिकारों की जीवंत क्रांति थीं।
जब समाज में महिलाओं को पढ़ने से रोका जाता था, तब उन्होंने शिक्षा को
सबसे बड़ा हथियार बनाकर सामाजिक कुरीतियों को चुनौती दी।
🗣️ “शिक्षा ही सामाजिक बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम” – श्री दिनेश यदू
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संभागीय अध्यक्ष श्री दिनेश यदू ने कहा कि
सावित्रीबाई फुले की जयंती हमें यह याद दिलाती है कि,सेवा और शिक्षा के बिना समाज का उत्थान संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले
समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध थीं।
उनका स्पष्ट विश्वास था कि
“शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन है।”
उन्होंने ज्ञान और अध्ययन के माध्यम से जीवन में परिवर्तन लाने पर बल दिया
और जरूरतमंदों, वंचितों व महिलाओं के लिए किए गए उनके कार्यों को
आज भी प्रासंगिक और प्रेरणादायी बताया।
🌸 “नारी सशक्तीकरण को नई दिशा देने वाली युगपुरुष थीं सावित्रीबाई फुले” – ओम साहू
इस अवसर पर ओम साहू ने सावित्रीबाई फुले को नमन करते हुए कहा कि–
उन्होंने महिलाओं को शिक्षा के मूल अधिकार से जोड़कर
नारी सशक्तीकरण को एक नई पहचान और दिशा दी।
उन्होंने कहा कि सामाजिक कुरीतियों, तिरस्कार और विरोध के बावजूद
देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित करना
सावित्रीबाई फुले के साहस और दूरदर्शिता का प्रमाण है।
“उनका प्रेरणादायी जीवन आज भी समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण के लिए
एक मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ बना हुआ है।”
🔚 संदेश–
कार्यक्रम के अंत में उपस्थितजनों ने संकल्प लिया कि
सावित्रीबाई फुले के विचारों को केवल स्मरण तक सीमित नहीं रखेंगे,
बल्कि शिक्षा, समानता और महिला सम्मान को
समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।