“जब बस्तर के अंदरूनी गांव में जली शिक्षा की मशाल: घाटलोहंगा में रचा गया इतिहास”
3 जनवरी 2026 जगदलपुर/ सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर आज एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने बस्तर के सामाजिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। बस्तर जिले के अंदरूनी गांव ग्राम घाटलोहंगा में पहली बार क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती पूरे सम्मान और जनभागीदारी के साथ मनाई गई। यह आयोजन न केवल एक कार्यक्रम था, बल्कि शिक्षा, समानता और सामाजिक चेतना की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।

इस ऐतिहासिक आयोजन का मार्गदर्शन ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष श्री राधेश्याम साहू ने किया। कार्यक्रम में बस्तर संभागीय अध्यक्ष श्री दिनेश यदू, संभागीय उपाध्यक्ष रामेश्वर बिसाई, संभागीय उपाध्यक्ष तुलसीराम ठाकुर तथा बस्तर जिला अध्यक्ष श्री रघुवंश यादव की उपस्थिति ने आयोजन को दिशा और ऊर्जा प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने सावित्रीबाई फुले के जीवन, संघर्ष और शिक्षा के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल एक समाज सुधारक नहीं, बल्कि शिक्षा के माध्यम से सामाजिक क्रांति की जननी थीं। उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों को अपनाने और शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर गांव में भाषण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरणादायी प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। कार्यक्रम की सबसे भावुक और प्रेरक प्रस्तुति तब देखने को मिली, जब बालिकाओं ने कविता पाठ किया और सावित्रीबाई फुले जी का जीवन परिचय प्रस्तुत किया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि शिक्षा की अलख अब बस्तर के अंदरूनी गांवों तक पहुंच रही है।
सावित्रीबाई फुले एक महान समाज सुधारक और शिक्षा की प्रबल समर्थक थीं। उन्होंने महिलाओं और दलितों के उत्थान के लिए संघर्ष किया और समाज को यह सिखाया कि शिक्षा ही समानता और सम्मान का सबसे मजबूत आधार है। उनकी जयंती पर घाटलोहंगा के ग्रामीणों ने उनके विचारों को जीवन में उतारने और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित बनाने का संकल्प लिया।