बस्तर में बढ़ेगा तिलहनी फसलों का रकबा, कृषि विज्ञान केंद्र की अनूठी पहल

रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

Jul 10, 2026 - 22:18
बस्तर में बढ़ेगा तिलहनी फसलों का रकबा, कृषि विज्ञान केंद्र की अनूठी पहल
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जगदलपुर, 10 जुलाई 2026/ जिले में पारंपरिक और नकदी फसलों के साथ-साथ अब तिलहनी फसलों के क्षेत्र विस्तार के लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विशेष पहल की जा रही है, जिसके तहत खरीफ सीजन में जिले के विभिन्न ब्लॉकों में 'रामतिल' (नाइजर) और 'तिल' (सेसमे) के व्यापक प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मक्का जैसी फसलों के विकल्प के रूप में कम लागत और अधिक मुनाफे वाली खेती को बढ़ावा देना है, जिसके लिए इस सीजन में बस्तर के कुल 225 एकड़ क्षेत्र में अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन के लिए कार्ययोजना तैयार किया गया है।

         इस योजना के अंतर्गत बस्तानार, बस्तर, दरभा और चित्रकोट के गुरिया क्षेत्र में कुल 200 एकड़ में रामतिल का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 100 से 200 प्रगतिशील किसानों को शामिल किया जा रहा है। इन किसानों को न्यूनतम एक एकड़ और अधिकतम दो एकड़ के लिए उन्नत बीज व तकनीकी मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिसकी बुआई अगस्त महीने में संपन्न होनी है और इसके लिए वर्तमान में किसानों का चिन्हांकन तेजी से चल रहा है। इसी तरह तोकापाल और बस्तर ब्लॉक में कुल 25 एकड़ में तिल का प्रदर्शन किया जा रहा है, जिसमें 15 से 25 किसानों को जोड़कर बुआई की प्रक्रिया को लगभग पूर्णता की ओर ले जाया जा चुका है।

            

             कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह पूरा कार्यक्रम सरकार की फसल विविधीकरण नीति के तहत चलाया जा रहा है, जहाँ मक्का फसल के एक मजबूत और वैकल्पिक रूप में इन तेल वाली फसलों को प्रमोट किया जा रहा है। इन फसलों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन्हें बहुत कम रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है और इनमें कीड़े व बीमारियों का प्रकोप भी नाममात्र का होता है, जिससे किसानों की इनपुट कॉस्ट यानी लागत बेहद कम हो जाती है। इसके साथ ही पारंपरिक खेती के जानकार मानते हैं कि रामतिल के आकर्षक पीले फूल न केवल खेतों की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि धान के फूल आने के समय मधुमक्खियों को भी भारी संख्या में आकर्षित करते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से परागण बढ़ता है और आसपास की धान की फसलों के उत्पादन पर भी इसका बेहद सकारात्मक असर देखने को मिलता है।

 आज बाजार में खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों को देखते हुए शासन की नीतियों के अनुरूप बस्तर के किसानों का रुझान अब धीरे-धीरे पुनः तिलहनी फसलों की ओर लौट रहा है, जिससे आने वाले समय में जिले के कृषि परिदृश्य में एक बड़ा और लाभकारी बदलाव देखने को मिलेगा।

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