डबरी निर्माण से बदली किसान की तस्वीर, विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) से जल संरक्षण को मिली नई दिशा

रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

Jul 15, 2026 - 04:51
डबरी निर्माण से बदली किसान की तस्वीर, विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) से जल संरक्षण को मिली नई दिशा
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जगदलपुर, 14 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” के अंतर्गत ग्राम पंचायत खोटलापल में किए गए डबरी निर्माण कार्य ने जल संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आजीविका को भी नई मजबूती प्रदान की है। बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड ग्राम खोटलापाल निवासी श्री सोनधर द्वारा डबरी निर्माण कार्य से ग्रामीण विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है।

सोनधर ने बताया कि पहले वर्षा का अधिकांश पानी बह जाता था, जिससे उसे गर्मी के मौसम में खेतों में सिंचाई का संकट उत्पन्न हो जाता था। डबरी निर्माण के बाद अब वर्षा जल का प्रभावी संचयन हो रहा है, जिससे खेतों को समय पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है।इस जल संरचना से न केवल भूजल स्तर में सुधार की संभावना बढ़ी है, बल्कि उसको अतिरिक्त फसल लेने का अवसर भी मिला है। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होने के साथ उसकी आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। पशुपालन और बाड़ी विकास जैसी गतिविधियों को भी इससे नया संबल मिला है।

ग्रामीण सोनधर ने बताया कि यह डबरी केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि आजीविका का अतिरिक्त साधन भी बन गई है। इसमें मछली पालन किया जा रहा है, जिससे हर वर्ष अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। हितग्राही ने भविष्य में बतख पालन शुरू करने की भी इच्छा व्यक्त की है, जिससे आय के और अधिक अवसर सृजित होंगे।डबरी निर्माण के दौरान ग्राम पंचायत के जॉब कार्डधारी ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला। इससे ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हुआ और पलायन पर भी रोक लगाने में मदद मिली।जल संरक्षण की इस पहल का सकारात्मक प्रभाव आसपास के क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। डबरी के कारण भू-जल स्तर में सुधार हुआ है, जिससे आसपास के कुओं और हैंडपंपों में जल उपलब्धता बढ़ी है तथा खेतों की मिट्टी में नमी बनी रहने से कृषि उत्पादन को भी लाभ मिल रहा है।

ग्राम पंचायत खोटलापल में डबरी निर्माण यह साबित करता है कि यदि जल संरक्षण के कार्यों को जनभागीदारी के साथ प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, आजीविका और पर्यावरण—तीनों को एक साथ सशक्त बनाया जा सकता है। विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के माध्यम से ऐसे कार्य ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहे हैं।

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