वैज्ञानिक जानकारी और संवेदनशील दृष्टिकोण से ही दूर होगा एचआईवी का डर और सामाजिक भेदभाव

रिपोर्ट – जय शंकर पांडे

Aug 21, 2026 - 19:28
वैज्ञानिक जानकारी और संवेदनशील दृष्टिकोण से ही दूर होगा एचआईवी का डर और सामाजिक भेदभाव
किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम, जगदलपुर में नोडल शिक्षकों का एचआईवी-एड्स पर संवेदनशील प्रशिक्षण संपन्न
CG VARTA -

जगदलपुर, 21 अगस्त 2026/ किशोरावस्था शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल स्थित शहीद गुंडाधुर प्रेरणा भवन में जिले के सभी विकासखंडों से आए नोडल शिक्षकों के लिए एक दिवसीय संवेदनशील प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को एचआईवी-एड्स के संबंध में प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना रहा, ताकि वे विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को सही मार्गदर्शन देकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों, भय और भेदभाव को समाप्त करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें।

         इस प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्बताया कि एचआईवी मुख्य रूप से चार मार्गों—असुरक्षित यौन संपर्क, संक्रमित सुई या सिरिंज का साझा उपयोग, बिना जांच किया हुआ संक्रमित रक्त चढ़ाने और संक्रमित मां से उसके बच्चे में (गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान)—से ही फैलता है। इन जोखिमों से बचाव के लिए सुरक्षित व्यवहार, नई सुई-सिरिंज का प्रयोग, जांचे गए रक्त उत्पादों का उपयोग और गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच व उपचार को अनिवार्य है।साथ ही यह भ्रांति भी दूर की गई कि एचआईवी हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ खाने-पढ़ने या सामान्य सामाजिक संपर्कों से नहीं फैलता, इसलिए प्रभावित व्यक्तियों से दूरी बनाना या भेदभाव करना पूरी तरह निराधार है।

          कार्यशाला में प्रतिभागियों को एचआईवी एवं एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के कानूनी प्रावधानों से भी अवगत कराया गया। इसके तहत शिक्षा, रोजगार, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं में संक्रमित व्यक्तियों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव प्रतिबंधित है तथा व्यक्ति की मेडिकल स्थिति की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य है। नियमों का उल्लंघन करने या गोपनीय जानकारी अनुचित तरीके से उजागर करने पर कारावास और जुर्माने का सख्त प्रावधान है।

           इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधाओं पर चर्चा करते हुए आईसीटीसी केंद्रों की भूमिका रेखांकित की गई, जहां पूर्ण गोपनीयता के साथ निःशुल्क परामर्श और जांच उपलब्ध कराई जाती है। विशेषज्ञों ने एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी के महत्व पर बल देते हुए बताया कि नियमित दवा सेवन से शरीर में वायरस की सक्रियता नियंत्रित रहती है और व्यक्ति स्वस्थ व सामान्य जीवन जी सकता है। नाको के तहत यह उपचार और संबंधित जांचें पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाती हैं।

         शिक्षा विभाग के समन्वय से आयोजित यह कार्यशाला संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं बस्तर संभाग डॉ. महेश सांडिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक तथा जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सी. मैत्री के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। कार्यक्रम में क्लस्टर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. दीक्षा सिंह, काउंसलर मुकुंद दीवान, डीएमडी डॉ. शैलेन्द्र यादव, जिला डाटा मैनेजर गिरीश धनकर, गौरव पांडे सहित संबंधित अधिकारी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।

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