रेल, हवाई और सड़क कनेक्टिविटी की मांग को लेकर सर्व समाज आया आगे
कुमार जयदेव से समाज प्रमुखों ने की मुलाकात, पीएम और केन्द्रीय रेलमंत्री से करेंगे मुलाकात
17 मार्च 2026 ,जगदलपुर/ बस्तर के समाज प्रमुखों ने रेल, हवाई सेवा, सड़क कनेक्टिविटी से जुड़ी बहुप्रतीक्षित मांगों को लेकर सुकमा जमीदार कुमार जयदेव से चर्चा की, इस पर उन्होंने जल्द ही प्रधानमंत्री व केंद्रीय रेलमंत्री इस ओर ध्यान आकृष्ट कराने का भरोसा दिलाया है। कुमार जयदेव के अनुसार 6 दशकों में रेलवे को लौह अयस्क की ढुलाई से 1965 से 2025 तक लगभग 1 लाख करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके एवज में बस्तर में यात्री रेल सुविधा का विस्तार कम हुआ है पर अब सरकार से उम्मीद है कि जल्द से जल्द बस्तर को सुविधाएं मिले। बस्तरिया समाज की बैठक में बस्तर सहित दंतेवाड़ा, कोंडागांव, नारायणपुर, केशकाल, सुकमा और बीजापुर के मूल समाज प्रमुख सम्मलित हुए थे।

उन्होंने कहा कि नवरंगपुर से मलकानगिरी तक प्रस्तावित नई रेललाइन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट में सम्मलित है। इस रेललाइन को नवरंगपुर से पीछे जूनागढ़ तक सर्वे हो चुका है, यदि जूनागढ़ से नवरंगपुर और नवरंगपुर से जैपुर के बीच जितना शीघ्र रेल लाइन बिछाई जाती तो बस्तरवासियों को जगदलपुर से रायपुर के लिए सुगम रेलयात्रा संभव हो पाएगा। इस लाइन से जगदलपुर से रायपुर की दूरी लगभग 430 किमी होगा, इसलिए इस नई रेललाइन निर्माण के लिए केंद्रीय रेलमंत्री को गम्भीरता से पहल करना चाहिए। इसके अलावा दल्ली राजहरा-जगदलपुर रेल परियोजना का कार्य शीघ्र शुरू करने के साथ ही प्रस्तावित नई रेल लाइनों को स्वीकृति मिले। इसी तरह बस्तर को हवाई सेवा से जोड़ा जाए। खासकर हवाई सेवा जगदलपुर, रायपुर उड़ान तत्काल बहाल हो तथा जगदलपुर से दिल्ली, मुंबई, विशाखापत्तनम, हैदराबाद और कोलकाता के लिए नियमित विमान सेवा शुरू की जाए।
नक्सलमुक्त बस्तर में सरकारों से उम्मीद की नई किरण
सुकमा जमीदार कुमार जयदेव ने कहा कि नक्सलवाद के प्रभाव में लंबे समय तक पिछड़े बस्तर को अब नक्सलमुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं, ऐसे में आने वाला समय निवेश और औद्योगिक विकास के लिए निर्णायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार बस्तरवासियों की इन महत्वपूर्ण और जायज मांगों पर खरा उतरे तो बस्तरियों की आने वाली पीढ़ी को उच्च शिक्षा स्वास्थ्य के लिए आसानी होगी और अब सरकारों से उम्मीद भी है कि जल्द ही बस्तरवासियों की मांगों को पूरा किया जाएगा।